नादान-इ-दिल

आंशू का कीमत वही जाने
जो आंशू बहाया है,
आंशू का कीमत वही जाने
जो आंशू को आजमाया है,

लोग ज़माने मैं हैं बहुत
हमे दर्द देने के लिए,
लोग ज़माने मैं हैं बहुत
हमे रुलाने के लिए,

जब कोई क़सूर किया नहीं मैंने
फिर भी ये इलज़ाम क्यों,
जब कोई क़सूर किया नहीं मैंने
तोह हम पे सवाल क्यों,

सादगी तोह इबादत है खुदा की
इसमें सचाई बैठता है,
सादगी तोह इबादत है खुदा की
इसमें ज़न्नत खिलता है,

जो इंसान नासमझ है
उससे समझाना हि मायुशि है
जो इंसान नासमझ है
उस्सको बोलना ही बेकार है,

जिनके जेहने मैं गुरूर है
उनको सादगी का क्या मोल है,
जिनके जेहने मैं गुरूर है,
उनको सच्चाई का क्या बोल है,

फिर भी ये नादान दिल
दोस्ती को गले लगा बैठता है,
फिर भी ये नादान दिल
सब इलज़ाम को घुट घुट के पिता है

ये दुनिया कितना अजीब है
अच्छाई का कोई क़दर नहीं,
ये दुनिया कितना अजीब है
सच्चाई का कोई परवाह नहीं,

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