ज़ख़्म आखिर जखम होता है…..

ज़ख़्म आखिर जखम होता है
चाहे वो अपनी जिस्म का हो
या अपनी दिल का हो
ज़ख़्म आखिर जखम होता है।।।।

जिस्म का ज़ख़्म दिखाई देता है
जिससे हर कोई देख सकता है
कुछ लोग को ज़ख़्म का दर्द
अहसास होने लगता है,
पर दिल का ज़ख़्म
न कोई देख सकता है
न किसीको दिखा सकते हो,
और ज़ख़्म जो दिल से उभरता है
उसका दर्द सिर्फ खुद ही
अहसास कर सकते हो ।।।।

जिस्म का दर्द के ऊपर
तो हम
मरहम पट्टी लगबा सकते हैं
जिससे हमे थोड़ा राहत और
सुकून मिले,
चाहे ज़ख़्म कितनी बड़ी न हो
वो फिर भर जाता है।।।

लेकिन दिल का ज़ख़्म के
ऊपर मरहम पट्टी लगाना
इतना मुमकिन नहीं होता है,
उसका दर्द को भर पाना बी
इतना मुमकिन नहीं होता है,

छोटा हो या बड़ा,
जिस्म का ज़ख़्म एक दिन
जरूर भर जाता है,
लेकिन दिल का ज़ख्म
ज़िन्दगी भर वैसा ही
खुला रहता है ।।।।।
न उसे
हम भर पाते हैं
न उससे वक़्त
कभी भर पाता है,
आखिर सांस तक
वो ज़ख़्म ज़ख़्म ही
बांके रहता है,
चाहे तुम लाखो
कोशिश करलो,
दिल का ज़ख़्म हमेसा
दर्द दिलाता रहता है।।।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *