कुछ दर्द ऐसा होता है
ना उसे ज़ुबान से बयां कर सकते
ना उसे किसीको बता सकते है
वो तोह अंदर ही अंदर
चुभता रहता है
दिल मैं उसका घुटन
चलता रहता है।
खुशियां गुलाबो के तरह है
जिसे किसीको दिखा सकते हो
आजमा सकते हो
खुशियों का खुशनुमा पल
हरकिसीको सुकून दिला सकता है
और दुसरो के दिल मैं
मिठास पैदा कर सकता ह।
पर दर्द कुछ अलग चीज़ है
उसे ना तुम सबको बता सकते हो
ना समझा सकते हो
उसे सिर्फ अहसास कर सकते हो,
जो दर्द को खुद झेला है
या दर्द को आजमा सकता है
वही सिर्फ दर्द का तकलीफ
अंदर से समझ सकता है ।
जब किसी को दर्द का
गहरा चोट लगता है,
वो अंदर ही अंदर
दर्द का पीड़ा खुद सेह्ता है,
तब वो सोचता है
काश कोई एक इंसान फरिस्ता के तरह आये
और उसका दर्द को समझ सके
पर वो मुमकिन नहीं होता है
सबके साथ,
ना उसे मिलता है एक सच्चा साथी
फिर भी वो आस लगा के बैठता है
काश उसके दर्द को समझनेवाला
कोई दस्तक दे दिल के दरवाजे पे।
